हमें क्या चाहिये? : लोकोपकारी पूंजीपति या भष्ट्र राजनेता, अफसर

हमें क्या चाहिये? : लोकोपकारी पूंजीपति या भष्ट्र राजनेता, अफसर

जो काला धन ब्रिटीश सत्ता में कहीं नहीं था वही आजादी के बाद हमारी अर्थनीति और राजनीति को नियंत्रित करनेवाली सबसे निर्णायक शक्ति बन गया. नतीजा बेहद दारूण रहा. हिंदुस्थान की प्रतिभा को जितना नुकसान मुगलों या अंग्रेजो की सामूहिक सत्ता ने नहीं पहुँचाया, उतना नुकसान नेहरू और इंदिरा की अर्थनीति ने पहुँचा दिया. ये दोनों नेता व्यक्तिगत रूप से बेहद र्इमानदार थे. इनके विरोधी भी इनका सम्मान करते थे. नेहरू जहॉं हमारे स्वाधिनता समर के लोकप्रिय नेता और बेमिसाल लेखक थे वहीं इंदिराजी बेहद बहादुर नेता थी और विश्व राजनीति में अपना रूतबा रखती थी. किंतु प्रत्येक मनुष्य में अंतर्भूत विस्तार की र्इश्वरीय प्रेरणा का ही गला घोँट देने की अपनी नीतियों के कारण, वे दोनों, उनको मिले स्वर्णिम अवसर को तबाह कर देने के अपराधी माने गये.

पुढे वाचा  अ‍ॅड  दिनेश शर्मा यांचा लेख

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